Friday 22 August 2008

कुछ संजीदा हुआ जाए..............


ज़िन्दगी की किताब में ,आधे ख्वाब हैं कुछ फ़साने ,
चंद वरक अभी हैं 'अनीस',चलो इक ग़ज़ल लिखा जाए.
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आने वाली ग़ज़ल........ "अनीस"

1 comment:

Anonymous said...

tasveeren to khwab hi deti hain,
fasane banane padte hain,
khwab mei kho to jate hain par hum wahan pahuch nahi pate.....